म्यान से फिर तलवार निकाल प्रहार करो
बन चंडी,तुम असुरों का संहार करो
तुम सहमी हो? वो सहमें कुछ ऐसा हो
हे!द्रौपदी तुम काली का अवतार धरो
जिंदा हो तो होने का एहसास कराओ
मार छलंगी बहता दरिया पार करो
सब की सुनकर कौन है? आगे बढ़ पाया
खुद की सुन ,और पांव चांद के पार धरो
।। विक्रम सिंह ।।
बन चंडी,तुम असुरों का संहार करो
तुम सहमी हो? वो सहमें कुछ ऐसा हो
हे!द्रौपदी तुम काली का अवतार धरो
जिंदा हो तो होने का एहसास कराओ
मार छलंगी बहता दरिया पार करो
सब की सुनकर कौन है? आगे बढ़ पाया
खुद की सुन ,और पांव चांद के पार धरो
।। विक्रम सिंह ।।
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