बेटी अब ऐसे बचाना होगा कि ,
दोषी को जिन्दा जलाना होगा।।
मांगने से अब न मिलना जुलना कुछ
न्याय अब खुदसे हि पाना होगा
शर्म भी शर्मिंदा होता देख कर
कोई बच्ची जा रहा है फेंक कर
हम भला है चुप्पी साधे किसलिए
चीखेंगे क्या अब अपनी बच्ची देखकर
बेटीयों को दोष देना छोड़ दो, अब
गलत बेटे का भी मुह तो तोड़ दो
बेटी को भी बेटे तो प्यार दो, औ
बेटे को भी बेटी सा संस्कार दो
बेटी को इज्ज़त अगर न दे सके
ऐसे बेटे इससे अच्छा मार दो।।
इनका तो ऐसे ही अब उपचार होगा
दोषी के सीने से खंज़र पार होगा ।।
बेटी अब ऐसे बचाना होगा, कि
दोषी को जिन्दा जलाना होगा।।
दोषी को जिन्दा........
।। विक्रम सिंह ।।
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